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| श्री भोमिया चालीसा |
श्री भोमिया चालीसा
शैल
शिखर सम्मेत के, सांवलिया जिनराज।
निशदिन मेरी
वंदना, तारण-तरण जहाज ॥दोहा॥
तीरथ
रक्षक देव भोमिया। साथ निभावे देव भोमिया ॥1॥
इक
कर शस्तर इक कर खप्पर। देव भोमिया सबको सुखकर ॥2॥
पुव्व
देश के भैरूं कहाते। सुमिरत झटपट दौड़े आते ॥3॥
भटके
राही पथ पा जाते। जो भैरूं का ध्यान लगाते ॥4॥
क्षां क्षीं क्षूं क्षौं नमः भोमिया। सरल सहज है देव भोमिया
॥5॥
लेते
कुछ ना, सब कुछ देते। देख भगत मुस्काते हेते ॥6॥
हेत भरेली
नजर सुहानी। बाबा तेरी अजब कहानी ॥7॥
भक्तों
पर किरपा है पूरी। इच्छा कोई न रहे अधूरी ॥8॥
रिमझिम रिमझिम
बरसे सावन। भक्त गृहों का महके आंगन ॥9॥
संकट
मेटे कष्ट निवारे। बाबा है सच्चे रखवारे ॥10॥
जो मन से
नित जाप करेगा। वैभव-कोष अखंड लहेगा ॥11॥
चमत्कार
बाबा का भारी। ध्यान जाप करते नर-नारी ॥12॥
